कोरोना काल के 14 माह में दिखाए जज्बे को सलाम
भीलवाड़ा। कोरोना के रूप में अचानक सामने आई आपदा ने दुनिया को एक झटके से कई सबक सीखा दिए। कोरोना वायरस से जंग में अग्रिम मोर्च पर चिकित्साकर्मी तैनात रहे। मुश्किल समय में डॉक्टर्स ने अपनी पेशेगत सेवा से मानवता को बचाए रखा। एेसे में स्विस मनोचिकित्सक कार्ल जंग की यह पंक्तियां, 'दवा बीमारियों का इलाज करती है लेकिन केवल डॉक्टर ही मरीजों को ठीक कर सकते हैंÓ सटीक बैठती है। पिछले १४ माह में डॉक्टर और स्वास्थ्य कार्यकर्ता कोविड-19 के कठिन दौर में लोगों की सांसे बचाने को जूझ रहे हैं। इस घातक वायरस से लड़ते हुए कई डॉक्टर खुद इसकी चपेट में आ चुके। कुछ तो जिंदगी की जंग भी हार गए। बहुत सारे डॉक्टरों का सामूहिक प्रयास हमेशा याद रखा जाएगा। ------ डॉ. सुरेश ने बिन पीपीई किट देखे मरीज मांडलगढ़ में कार्यरत डॉ. सुरेश गजराज को सीएमएचओ ने आयुष चिकित्सालय में लगाया। डॉ. गजराज ने पहली व दूसरी लहर में डॉक्टर विनोद शर्मा के साथ ८० से १०० मरीजों की देखभाल की। पहले पीपीई कीट में मरीजों के देखते थे, लेकिन लगातार २४ घंटे काम करने के दौरान पीपीई से परेशानी होनेलगी तो पहनना बंद कर दिया। आयुष चिकित्सालय में ...