गुलाल में हो रही मिलावट, सिल्वर कलर से कैंसर का खतरा
भीलवाड़ा। होली का पर्व रविवार को मनाया जाएगा। वही रंग अगले दिन धुलंडी को खेला जाएगा। हालांकि भीलवाड़ा शहर में शीतला सप्तमी को खेला जाता है। लेकिन शहर में अन्य राज्यों से आए लोग धुलंडी को भी रंग खेलते है। होली हो और रंग न हों, ये सोचा भी नहीं जा सकता। यदि रंग हर्बल हैं तो खेलने में कोई परेशानी नहीं है। लेकिन बाकी रंग त्वचा के लिए घातक होते हैं क्योंकि इनमेंं लेड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट जैसे खतरनाक केमिकल होते हैं। इनका सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ता है। गहरे रंगों का संबंध ऑक्यूलर टॉक्सिसिटी से होता है। ये आंखों को नुकसान पहुंचाते हैं। आंखों में खुजली, पानी आना, जलन हो सकती है। रंगों में एसिड और केमिकल की वजह से त्वचा संबंधी एलर्जी होती है। शहर में कुछ दुकानों को छोड़कर अन्य स्थानों पर बिकने वाले रंग हो या गुलाल इनमें मिलावट की जाती है। गुलाल सामान्य तौर पर अरारोट में रंग मिलाकर तैयार किया जाता है। बाजार में इसकी कीमत ६० रुपए किलोग्राम हैं। लेकिन इसमें भी मार्बल डस्ट मिलाई जा रही है। ऐसे में इसकी कीमत बहुत कम हो जाती है। मार्बल डस्ट का गुलाल थोक बाजार में २५ रुपए किलो बिक रहा है। इसके इस्त...