55 साल से जारी हरे राम...हरे राम...

अयोध्या में श्रीरामलला की सोमवार को प्राण प्रतिष्ठा को लेकर शहर राममयी हो गया। लेकिन भीलवाड़ा में एक ऐसा मंदिर है जहां 55 साल से हरे राम- हरे राम, राम राम हरे हरे कीर्तन चल रहा है। सीतारामजी की बावड़ी िस्थत श्रीराम-हनुमान मंदिर में 15 से 20 साधक कीर्तन करते हैं। कीर्तन 24 घंटे चलते है। साधक तीन-तीन घंटे की शिफ्ट में कीर्तन करते हैं। प्रमुख रूप से सुबह 6 से 9 बजे व शाम 6 से 9 बजे तक वाद्य यंत्रों के साथ कीर्तन होता है। दोपहर में 3 से 4 बजे तक ओम नम: शिवाय का पाठ होता है।


कीर्तन प्रभारी मनीष सोनी ने बताया कि सीताराम सत्संग भवन में 55 साल से अखंड कीर्तन हो रहा है। पहले तीन-तीन लोग बैठकर पाठ करते थे। अब खड़े होकर परिक्रमा के रूप में पाठ होता है। भवन में राम दरबार, पंचमुखी दरबार, रामकृष्ण, रामचरणजी की तस्वीर, गणेशजी, संतोषीमाता गायत्री माता की प्रतिमा है।

सीतारामजी की बावड़ी 280 साल पुरानी है। रामस्नेही सम्प्रदाय के संस्थापक रामचरण महाराज ने बावड़ी की गुफा में तपस्या की थी। इसका निर्माण सम्वत 1800 के आस-पास साहूकार मियाचन्द तोषनीवाल ने किया था। शहर के हनुमान मंदिर में भी हनुमान चालीसा व भजन कीर्तन हो रहे हैं।
देवरिया बालाजी मंदिर : 50 साल से अखंड रामधुनी
50 साल से शहर के प्राचीन देवरिया बालाजी मंदिर में श्री राम-जय राम, जय-जय राम की अखंड रामधुनी कीर्तन चल रहा है। पुजारी कीर्ति कुमार महाराज ने बताया कि महंत कृष्णदास मौनी महाराज के सानिध्य में देवरिया बालाजी मंदिर में पचास साल से साधक खड़े रहकर रामधुनी कर रहे हैं। मंदिर के एक कक्ष में पाट सजा है। उस पर फूलों से सजी हनुमानजी महाराज की तस्वीर रखी है। साधक पाट के चारों तरफ घूमते हुए रामधुनी गाते हैं। प्रतिदिन यहां आने वाले कई श्रद्धालु भी इसमें शामिल होते हैं। हर तीन घंटे में साधक बदलते हैं। मंदिर के गर्भगृह में Òनिश्चिंत रहो मैं बैठा हूं लिखा हैÓ ।



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