आरजीएचएस के भुगतान पर सरकार का ब्रेक

भुगतान पर सरकार का ब्रेक
राजस्थान में नई सरकार का गठन हो गया, नया मुख्यमंत्री व दो उपमुख्यमंत्री मिल गए, लेकिन जनता को अभी राहत मिलना शुुरू नहीं हुई है। हालात यह है कि आरजीएचएस व चिरंजीवी योजनाओं का करोड़ों का भुगतान समय पर नहीं होने की वजह से आमजन व राजकीय कर्मचारियों के साथ पेंशनरों की मुसीबत बढ गई है।

कई निजी अस्पतालों में मरीजों को परामर्श तो मिल रहा है लेकिन ऑपरेशन व जांचें अटकी है। राज्य सरकार की तरफ से भुगतान नहीं देय होने से भीलवाड़ा व शाहपुरा जिले में कई मेडिकल स्टोर संचालकों ने दवाएं देना ही बंद कर दिया।
परेशान है आम से पेंशनर्स तक
कर्मचारी मदनलाल शर्मा बताते है कि गत माह आंखों की पीड़ा से परेशान है। निजी अस्पतालों की ओर से आरजीएचएस में भुगतान नहीं आने की वजह से ऑपरेशन करने में आनाकानी की जा रही है। पेंशनर श्यामसुंदरर पारीक ने बताया कि कई बीमारियों की वजह से दवाएं लेनी पड़ती है। पिछले 15 दिनों से मेडिकल स्टोर संचालकों की ओर से भुगतान नहीं आने की वजह से दवाएं देने से मना किया जा रहा। भूपेन्द्र सिंह ने बताया कि यहां निजी अस्पताल में जांच की सुविधा बंद होने की वजह से मजबूरी में बाहर जांच करानी पड़ी।

26 हजार पेंशनर्स
भीलवाड़ा व शाहपुरा जिले में दोनों योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या दो लाख से अधिक है। इनमें पेंशनर्स लाभाथीZ 26 हजार है जबकि राजकीय कर्मचारियों की संख्या डेढ़ लाख से अधिक। निजी अस्पताल को दोनों योजनाओं में तीन करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान बकाया है।
बिना भुगतान नहीं समाधान
बकाया भुगतान नहीं होने से दुकानदारों की वित्तीय िस्थति ठीक नहीं है। बिना भुगतान नहीं समाधान का नारा देते हुए जयपुर में सोमवार को बैठक हुई। इसमें जिले का संयोजक मुझे बनाया है। जिले के तीस से अधिक मेडिकल स्टोर्स के भी साढ़े तीन करोड़ रुपए बकाया है। जबकि प्रदेश के अस्पताल व मेडिकल स्टोर संचालकों का बकाया 700 करोड़ है।

सुनील कुमार भारद्धाज, संयोजक, भीलवाड़ा जिला निजी दवा विक्रेता संघ

नहीं मिल रही दवा
पेंशनर्स को आरजीएचएस योजना के तहत लम्बे समय से पूरी दवा नहीं मिल रही। एक पखवाड़े से तो मेडिकल स्टोर दवा हीं नहीं दे रहे हैं, इससे दोनों जिले के पेंशनर्स परेशान है। संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया है।

राजेश पाठोद्या, अध्यक्ष, राजस्थान पेंशनर्स मंच

कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान
आरजीएचएस बजट के अभाव में बंद है, वेतन मेंं से मासिक कटौती होने के बावजूद राज्य कर्मचारियों का इलाज इस स्कीम से नहीं मिल रहा, इससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

नीरज शर्मा, जिलाध्यक्ष, अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ


सरकार नीति स्पष्ट करे

दोनों योजनाओं में जिले के निजी चिकित्सालयों में बढ़ी संख्या में ऑपरेशन एवं जांचें हुई है। लाखों में भुगतान बकाया है। भुगतान नहीं आने से चिकित्सालयों की प्रबंधकीय एवं आंतरिक व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही है। सरकार अपनी नीति स्पष्ट करे।
दुष्यंत शर्मा, उपाध्यक्ष आईएमए, राजस्थान



source https://www.patrika.com/bhilwara-news/rghs-ka-paisa-8634454/

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