पत्रिका जनमन : महिलाओं को धक्के खाने पड़े, ऐसी छूट किस काम की
कानाराम मुण्डियार
सुबह के 9.30 बजे हैं और मैं भीलवाड़ा से वाया चित्तौड़गढ़ होकर सूरत जाने वाली राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) की बस में सवार हूं। बस यात्रियों से खचाखच भरी है। यात्री एक दूसरे को धक्का मारते हुए आगे खिसकने एवं जगह बनाने के प्रयास में जुटे हैं। बस में भीलवाड़ा से चित्तौडगढ़़, निम्बाहेड़ा आदि जगहों तक के लिए डेली अपडाउन करने वाले यात्रियों की भीड़ है। इसलिए लम्बी दूरी वाले यात्री भी परेशान हैं। यात्रियों की पीड़ा समझने के लिए मैं भी बस में सवार हुआ और चर्चा शुरू की तो उनकी पीड़ा छलक पड़ी। यात्रियों ने पत्रिका के साथ खुलकर बात की और राजस्थान रोडवेज, पेपर लीक प्रकरण, महिला सुरक्षा, सरकार की फ्री की घोषणाओं पर अपने विचार रखे।
ये उठाए मुद्दे
-सरकार ने हम महिलाओं के लिए किराए में 50 प्रतिशत छूट दे दी, लेकिन ऐसी छूट किस काम की, जिस यात्रा में राहत ही नहीं हो। सरकार को नई बसें चलानी चाहिए ताकि महिलाओं को भीड़ में धक्के नहीं खाने पड़े।-राजस्थान सरकार ने अन्य विभागों को बहुत-कुछ दिया, लेकिन रोडवेज को कुछ नहीं दिया। रोडवेज को नई बसें नहीं दी। यात्रियों को खड़े-खड़े व खटारा बसों में यात्रा करनी पड़ रही है।
-सरकार ने मेडिकल सेवा में अच्छे सुधार किए, लेकिन सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था व पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ढर्रा बिगाड़ दिया। ये दोनों बड़े मुद्दे हैं, जिनमें व्यापक सुधार की जरूरत है।-हमें ऐसी सरकार चुननी चाहिए, जो पेपर लीक जैसी घटनाओं पर ज्यादा सख्त हो। युवाओं के करियर के साथ खिलवाड़ ना हो और युवाओं को समय पर रोजगार मिले।
-चुनावी साल में त्योहार की तरह बाजारी ऑफर की तरह फ्री की घोषणाओं से राहत शुरू कर दी। लेकिन जनता को फ्री या छूट की बजाय सुदृढ़ सुविधाओं से राहत देनी चाहिए।
यात्रियों ने कहा
आज तो मुश्किल से सीट मिल गई। बाकी दिन में भीलवाड़ा से गंगरार तक खड़े रहकर यात्रा करनी पड़ती है। चुनाव में कैसे प्रत्याशी का चयन के सवाल पर पुरोहित ने कहा कि हम तो ऐसे नेता को ही चुनेंगे जिनके पास राहत का विजन स्पष्ट हो।
-अजन्ता पुरोहित, दैनिक यात्री
यदि सरकार चाहें तो रोडवेज के सभी कर्मचारी एक-एक माह की तनख्वाह देने को तैयार हैं, जिससे रोडवेज घाटे से उबर जाए और यात्रियों के लिए नई बसें मिल जाए।
-योगेन्द्रसिंह, परिचालक, रोडवेज
रोडवेज बस विश्वविद्यालय के सामने नहीं रूकती। सैकड़ों विद्यार्थियों को गंगरार स्टेशन उतरकर पैदल जाना पड़ता है। मैं पहली बार वोट दूंगा।
-कैलाश बैरवा, छात्र मेवाड़ विश्वविद्यालय
सरकार की नीतियों ने रोडवेज को संकट में ला दिया। लोक परिवहन की निजी सेवा से हालात बिगड़ रहे हैं। राजस्थान को हरियाणा रोडवेज से कुछ सीखना चाहिए। अन्यथा मध्यप्रदेश की तरह राजस्थान की परिवहन व्यवस्था माफियाओं के हाथ आ जाएगी।
-योगेश भट्ट, यात्री
भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ समेत अन्य शहरों में टूटी सड़कें और बेहाल सीवरेज सिस्टम ही बड़ी परेशानी है। हर तीन माह में सड़कें तोड़ी जा रही है। व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं। मन की आवाज सुनकर वोट जरूर देेेंगे और पारदर्शी सरकार चुनेंगे।
-निखिल उपाध्याय, यात्री
source https://www.patrika.com/bhilwara-news/rajasthan-election-patrika-janman-talk-with-roadways-bus-passengers-8565028/
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