कीमतों ने दाल कर दी पतली

विदेश से आयात बढऩे और कमजोर मांग के चलते खाद्य तेलों में लगातार मंदी आती जा रही है लेकिन, दालों के भावों ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी हैं। इस साल कई राज्यों में कमजोर मानसून से दलहनी फसलों पर बुरा असर हुआ है। एमपी, महाराष्ट्र, यूपी और कर्नाटक मेें सर्वाधिक दलहनी फसलों की बुवाई की जाती है। इस साल दो सावन होने के बावजूद बारिश कम हुई। इससे दालों के भाव बढ़ते चले गए।


राजस्थान के कई जिलों में ज्यादा खपत वाली तुअर दाल के दाम बीती अगस्त में 130 से 135 रुपए प्रति किलो थे। जो अब 140 से 150 रुपए तक हैं। काबुली चना 80-90 से बढकर 93 से 160 रुपए पर पहुंच गया है। मूंग छिलका दाल 98 से 102, उड़द मोगर 107 से 118, उड़द दाल 98 से 105, मलका मसूर 73 से 75, मसूर काला 69 से 72, चवला मोगर 87 से 92, कला चना 66 से 68 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। दालों में 40 से 60 रुपए तक बढ़े हैं।


इस साल सितम्बर माह तक देश में 148.21 लाख टन खाद्य तेल का आयात हुआ है। इसमें इंडोनेशिया से करीब 41.28 लाख टन पाम ऑइल तथा 25.94 लाख टन आरबीडी पामोलीन का आयात हुआ। इसी तरह मलेशिया से 31.49 लाख टन सीपीओ तथा 5.98 लाख टन आरबीडी पामोलीन का आयात किया गया है।



source https://www.patrika.com/bhilwara-news/prices-have-become-thin-8496228/

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