आरओबी पर अफसर कर रहे खेल, एनजीटी की कोई रोक नहीं
भीलवाड़ा. शहर की सड़कों पर यातायात का दबाव है। आए दिन के जाम से लोग परेशान हैं। शहरवासी चाहते हैं कि ओवरब्रिज (आरओबी) बनाकर रोज-रोज के जाम से निजात मिले, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी समाधान को लेकर गंभीर नहीं है। नगर परिषद हो या जिंदल सॉ लिमिटेड, ओवरब्रिज पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की रोक का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। जबकि एनजीटी की इस पर किसी तरह की रोक नहीं है। राजस्थान पत्रिका ने एनजीटी के सभी आदेश को अध्ययन करने के बाद पाया कि एनजीटी की आरओबी निर्माण पर काई रोक नहीं। लेकिन अधिकारी एनजीटी के आदेश के नाम पर खेल रहे हैं।
गौरतलब है कि दो हिस्सों में बंटे शहर को जोड़ने के लिए अजमेर चौराहे की पुलिया है। इसके अलावा छह अंडरपास हैं, जो इतने संकरे हैं कि दुपहिया के अलावा अन्य वाहन गुजरना मुश्किल है। इधर, ओवरब्रिज को लेकर जिला प्रशासन की कोई योजना नहीं है। केवल अजमेर पुलिया को चौड़ा करने के लिए सर्वे के आदेश सार्वजनिक निर्माण विभाग को दिए हैं, लेकिन अभी सर्वे भी शुरू नहीं हुआ है। राजस्थान पत्रिका शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए एक और ओवरब्रिज की जरूरत के मामले को प्रमुखता से उठाता आया है।
12 साल पहले पानी की एवज में आरओबी का करार
नगर परिषद ने जिंदल सॉ से 5 अक्टूबर 2010 को पुर प्लांट को पानी देने को लेकर करार किया। इसमें जिंदल को पानी देने की एवज में रामधाम के सामने ओवरब्रिज बनाना था। यह पुलिया आजादनगर की माहेश्वरी पब्लिक स्कूल से रामधाम होते काशीपुरी सामुदायिक भवन, एनसीसी ऑफिस से सरस्वती सर्कल तक ओवरब्रिज बनना प्रस्तावित थी। इस पर 30 करोड़ रुपए व्यय होने थे। इसके लिए रेलवे स्वीकृति दे चुका। रेलवे ने पटरी के ऊपर डिजाइन के लिए दो फीसदी के हिसाब से 21.74 लाख रुपए मांगे, जो जिंदल ने एनजीटी में जमा कराए थे यह पैसा भी जिंदल को लौटा दिया।
कटने थे 40 पेड़, रोजाना परेशान हो रहे हजारों लोग
वर्ष 2017 में नौरतमल शर्मा ने एनजीटी की भोपाल बेंच में यह कहते वाद दायर किया कि शहर में आरओबी बनता है तो हजारों पेड़ कटेंगे। पर्यावरण को नुकसान होगा। आरओबी की जरूरत नहीं है। एनजीटी ने मामले में राज्य सरकार, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल, नगर परिषद तथा जिंदल सॉ लिमिटेड को पक्षकार बनाया। एनजीटी ने 11 सितम्बर 2017 को आदेश दिए कि जिला प्रशासन आरओबी मामले की समीक्षा करे, प्रशासन ने केवल अंडरपास को लेकर चर्चा की। नगर परिषद के सर्वे के अनुसार ओरओबी निर्माण में 40 पेड़ काटे जाने थे। शर्मा ने बताया कि रामधाम के ट्रस्ट्री के कहने पर वाद किया था। शर्मा रामधाम में गायों की देखरेख करते थे और पत्नी सुनीता वहां खाना बनाती थी।
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इनका कहना है...
जिन्दल को 30 करोड़ की लागत से आरओबी बनाना था। न्यायालय ने अगर रामधाम के यहां बनाने से मना किया है तो कहीं ओर बनाया जाना चाहिए। इसके लिए जिन्दल को जल्द नोटिस जारी किया जाएगा।
- राकेश पाठक, सभापति नगर परिषद भीलवाड़ा
source https://www.patrika.com/bhilwara-news/officers-are-playing-on-rob-there-is-no-restriction-of-ngt-7926053/
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