भीलवाड़ा न्यास की करालो जांच नहीं आएगी आंच

भीलवाड़ा. शहर में कोठारी नदी पर बने निर्माणाधीन ओवरब्रिज पर हुए भ्रष्टाचार के सुराख के मामले में नगर विकास न्यास अध्यक्ष व जिला कलक्टर आशीष मोदी की ओर से बैठाई गई जांच टीम पर ही सवाल उठ रहे है।

 

जिस न्यास अफसरों की देखरेख में ओवरब्रिज का निर्माण हुआ। उन्हें ही जिला कलक्टर ने क्लिनचिट देकर जांच का जिम्मा सौप दिया। ऐसे में जांच रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो रहे है। किसी भी दूसरी एजेंसी के अफसरों को टीम में शामिल ही नहीं किया गया। दिलचस्प पहलु शनिवार को यह नजर आया कि न्यास अभियंता की ओर से सुभाषनगर थाने में शनिवार को अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ ओवरब्रिज को क्षति पहुंचाने का मामला दर्ज किया। वही लोगों में चर्चा है कि अधिकारी कितनी भी जांच करवालो, लेकिन आंच किसी पर नहीं आएगी। चाहे वह उपभोक्ता भंडार का मामला हो या मांडल स्टेडियम निर्माण का हो।


पुलिस ने एफएसएल टीम को मौके पर ले जाकर सेम्पल लिए। ब्रिज निर्माण में मापदंड के अनुसार सामग्री का उपयोग हुआ या नहीं इसके लिए सरिए, सीमेंट कंक्रीट और अन्य निर्माण सामग्री के सेम्पल लिए है। इनको एफएसएल जांच के लिए भेजा जाएगा।

पांच करोड़ के भुगतान के बाद ही सुराख
न्यास अफसरों ने निर्माण एजेन्सी एचएस मेहता को भुगतान दो दिन पहले ही किया गया था। ठेकेदार का बिल पांच करोड़ से अधिक का था। लेकिन कटौतियों के बाद उसे 4.38 करोड़ का भुगतान किया गया। उसके एक दिन बाद ही ओवरब्रिज में गड़बडी सामने आ गई।

प्रारंम्भिक जांच में मिली गड़बड़ी
सुभाषनगर थाने में न्यास के अधिशासी अभियन्ता जगदीश पलसानिया की ओर से दर्ज कराए गए मामले के बाद थानाप्रभारी नंदलाल रिणवा एफएसएल टीम के साथ मौके पर पहुंचे। तो कई गड़बड़ी मिली। पुलिस ने न्यास अधिकारियों को मौके से मलबा हटाने के लिए मना किया था, लेकिन मौके पर मलबा नहीं मिला। सुराख के आस-पास के हिस्सा करीब 20 फीड़ और चौड़ा मिला। मिट्टी व गिट्टी को भी साफ किया हुआ था। फिर भी टीम ने सेम्पल के लिए सड़क पर डेढ किलो का हथौड़ा मारा तो सडक दरक गई और मिट्टी व रेत बिखर गई। इसमें गिट्टी तक नहीं निकली। हथौड़ा चलाने पर भी जोर नहीं आया। टीम के साथ आए बबराणा के नारायण जाट ने बताया कि आरसीसी को हथौड़े और छीणी से आसानी से खोद दिया। इस पर भारी वाहन चलेंगे तो यह कभी भी टूट सकता है।

किसने करवाया मलबा साफ
ओवरब्रिज से मलबा हटाने के लिए मजदूर किसने भेजे यह भी रहस्य बना हुआ है। न्यास के अधिकारियों ने मजदूर भेजने से साफ इंकार किया है। जबकि मजदूरों का कहना है उन्हें न्यास ने भेजा है।

न्यास ने करवाया मामला दर्ज
पलसानिया ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने धारा 427 व 3 पीडीपीपी एक्ट के तहत दर्ज किया। इसमें दस साल की सजा का प्रावधान है। पुलिस ने न्यास से इस मामले की फाइल की पत्रावलिया मांगी है।

जांच टीम पर ही सवाल
जिला कलक्टर के निर्देश पर चार सदस्यों की जांच टीम बनाई है। इस पर न्यास के अधिकारी ही सवाल खड़ा कर रहे है कि बनाने वाले भी हम ओर जांच करने वाले भी हम। तो सच्चाई सामने कैसे आएगी। जांच टीम में अधिशासी अभियन्ता रविश श्रीवास्तव, सहायक अभियन्ता रामप्रसाद जाट, कनिष्ठ अभियन्ता किशोर इसरानी तथा सहायक लेखाधिकारी अनिल शर्मा शामिल है। जांच टीम में एनएचआई, जिला पूल निर्माण या सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को शामिल किया जाना चाहिए था। जबक इनमें से एक भी एजेंसी को शामिल नहीं किया गया।



source https://www.patrika.com/bhilwara-news/karalo-investigation-of-bhilwara-trust-will-not-come-in-fire-7902746/

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