फाइल में दफन आदेश, पल्ला झाड़ने में जुटे अफसर

छह माह पहले अजमेर के ब्यावर में वार्मर हीट से दो मासूमों की मौत और अब भीलवाड़ा के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही ने दो नवजात की जिंदगी छीन ली। ऐसे हादसों से जिम्मेदारों ने सबक नहीं सीखा। उच्चाधिकारियों के आदेश फाइलों में दबे रहते हैं और अधिकारी इन्हें देखना भी मुनासिब नहीं समझते। अधिकारी न किसी घटना से सबक लेते हैं और न ही हादसों की जिम्मेदारी लेने को तैयार होते हैं। बस, हादसों के बाद पल्ला झाड़ने में लगे रहते हैं।

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के एमसीएच में हाल में वार्मर हीट से झुलसकर दो नवजात की मौत के बाद राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की तो पाया कि बेहतर इलाज को लेकर अधिकारियों के आदेश फाइलों में दबे हैं और मातहत हादसे के बाद भी ठीकरा एक दूसरे पर फोड़ने में जुटे हैं। दरअसल, 19 अप्रेल 2017 को आरसीएच के डायरेक्टर ने प्रदेश के सभी सीएमएचओ, पीएमओ समेत अन्य जिला चिकित्सा अधिकारियों को पत्र लिखा। इसमें नौ सदस्यीय समिति बनाई। समिति का प्रमुख उद्देश्य जनाना अस्पतालों में भर्ती माताओं और उनके नवजात बच्चों को बेहतर इलाज और देखभाल करना था। कमेटी का काम अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं का विस्तार करने और कमियां मिलने पर तत्काल दुरस्त करना था। भीलवाड़ा में भी चिकित्सा प्रबंधन को यह आदेश मिला।

शुरू में हुई बैठक, फिर भूले
कमेटी में पीएमओ, आरसीएचओ, एसएनसीयू, लेबर रूम, एसएनसीयू नर्सिंग, लेबर रूम नर्सिंग इंचार्ज के साथ हेल्थ मैनेजर, स्टोर प्रभारी और लेखाकार को शामिल थे। कमेटी को हर माह बैठक कर लिए निर्णय चिकित्सा मुख्यालय को भेजना थे। दिलचस्प पहलु यह है कि इस आदेश के बाद कुछ समय बैठक हुई। फिर इसे भूला दिया गया।

इन बिंदुओं पर करनी थी चर्चा
इस कमेटी को हर माह बैठक करनी थी। कमेटी को लेबर रूम और एसएनसीयू में उपलब्ध दवा और जरूरी चीजों की उपलब्धता, यहां मौजूद उपकरणों की िस्थति की जांच, उपकरणों की मरम्मत, मिलने वाली उपचार की िस्थति, अस्पताल की आकस्मिक जांच के साथ अन्य बिन्दुओं पर चर्चा करनी थी। यहां माताओं और शिशुओं की मौत और जन्मदर पर रिपोर्ट और जरूरत होने पर मशीनों को उपलब्ध कराने के लिए रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को भेजनी थी।

ध्यान देते तो नहीं जलते बच्चे
19 अप्रेल 2022 को ब्यावर के अमृतकौर अस्पताल में वार्मर हीट से दो बच्चों की मौत हो गई थी। जिम्मेदारों ने इस हादसे से सबक नहीं लियाया। जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी एमसीएच का निरीक्षण भी नहीं किया। इसका नतीजा यह रहा कि भीलवाड़ा में दो बच्चों की लापरवाही के कारण जलने से मौत हो गई।

हम नहीं दे सकते दखल
एनआईसीयू और पीआईसीयू यूनिट चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग के अधीन है। उसमें हम दखल नहीं दे सकते। दोनों यूनिट कोविड काल में बनी थी। डायरेक्टर आरसीएच की ओर से पूर्व में जारी निरीक्षण के आदेश एसएनसीयू के लिए हैं। हमारी जिम्मेदारी एसएनसीयू तक है। घटना के लिए मेडिकल कॉलेज और पीएमओ के अधीन कर्मी ही जिम्मेदार है।
- डॉ. संजीव शर्मा, आरसीएचओ, भीलवाड़ा
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मेडिकल कॉलेज का मामला
आरसीएचओ समय-सयम पर स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट को लेकर बैठक लेते हैं। कमियां सामने आने पर दूर किया जाता है। एनआईसीयू का मामला मेडिकल कॉलेज का है।
- डॉ. मुस्ताक खान, सीएमएचओ, भीलवाड़ा

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जिम्मेदारी से बचने की कोशिश

एक जगह गलती होने पर पूरे सिस्टम को गलत नहीं ठहराया जा सकता। यह पुरानी बात है कि यह मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। जिम्मेदारी से बचने के लिए अस्पताल को गलत ठहराया जा रहा। समय-समय पर निरीक्षण होता है।
- डॉ. अरुण गौड़, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी



source https://www.patrika.com/bhilwara-news/burial-orders-in-the-file-officers-engaged-in-overcoming-7845284/

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