पितृपक्ष में बनता है पितरों की पसंद का भोजन
भीलवाड़ा . पितृपक्ष में पितरों के लिए अलग ही भोजन बनाया जाता है। पितरों की पसंद को ध्यान में रखकर भोजन बनाया जाता है। उसे ब्राह्मण या जरूरतमंदों को परोसा जाता है। कहा जाता है कि इससे पितर खुश होते हैं। इस दौरान तामसिक भोजन न बनाया जाता है और न ही खाया जाता है। आजकल ब्राह्मणों को ध्यान में रखते भोजन तैयार किया जा रहा है।
पंडित अशोक व्यास का कहना है कि श्राद्ध का भोजन ऐसा होना चाहिए, जिससे मन में किसी भी तरह की उत्तेजना पैदा ना हो। बहुत सात्विक और मन को शांत करने वाला होना चाहिए। ज्यादा तेल का खाना ना ही बनाते हैं और ना ही खाते हैं। मटर और सरसों का उपयोग श्रेष्ठ है। घी से पकवान बनाए जाते हैं। ज्यादातर पकवान ऐसे होने चाहिए जो पितरों को पसंद है। गंगाजल, दूध, शहद, कुश और तिल जरूरी है। तिल होने से उसका फल अक्षय होता है। कहा जाता है कि तिल पिशाचों से श्राद्ध की रक्षा करते हैं। इसलिए खाने में तिल का इस्तेमाल किया जाता है।
उड़द की दाल के बड़े, दूध-घी से बने पकवान, जैसे खीर, पनीर, रायता, मौसमी सब्जियां जैसी लॉकी, तोरी, भिंडी, सीताफल आदि बनानी चाहिए। कई लोगों के यहां पूए बनते हैं। श्राद्ध के दौरान सिर्फ भोजन बनाने का महत्व ही नहीं बल्कि आप किस अवस्था में भोजन पका रहे हैं और क्या खा रहे हैं। इस पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। आजकल ब्राह्मणों को ध्यान रखकर भोजन तैयार किया जा रहा हैं, जो गलत है। हालांकि इससे कोई नुकसान नहीं है, लेकिन पितरों को जो पंसद हो वही भोजन बने तो ज्यादा अच्छा रहता है। ब्राह्मण अपनी पसंद भी बताने लगे हैं।
source https://www.patrika.com/bhilwara-news/father-s-choice-food-is-prepared-in-pitru-paksha-7772121/
Comments
Post a Comment