अमूल्य नीर की कैसी बर्बादी
भीलवाड़ा।
डेढ़ दशह तक जलसंकट झेल चुके वस्त्रनगरी के लिए चम्बल परियोजना वरदान बन गई है। जितना पानी चाहिए इसके कई गुना आपूर्ति हो रही। इसके बाद भी कई कॉलोनियां जलसंकट से जूझ रही। सुनकर आपको हैरानी होगी कि जलदाय विभाग के नियम के मुताबिक 135 प्रति लीटर प्रति व्यक्ति रोजाना पेयजल की जरुरत है। इसके मुकाबले विभाग 180 लीटर पेयजल दे रहा है। इसके बाद भी शहर की कई कॉलोनियां ऐसी भी है जहां बूंद-बूंद के लिए मशक्कत हो रही है। मार्च माह में ही गर्मी ने दस्तक दे दी है और मई-जून माह अभी बाकी है। इतनी आपूर्ति के बाद भी जलसंकट की स्थिति बनना आश्चर्य चकित करता है। इतना जलापूर्ति होने के बाद भी पानी कहां जा रहा है। इसका जवाब विभाग के पास भी नहीं है। ऐसे में अमूल्य नीर की बर्बादी होना सम्भव है।
जन स्वास्थ्य अभियात्रिकी विभाग के अनुसार भीलवाड़ा शहर की जनसंख्या साढ़े चार लाख के करीब है। विभाग का दावा है कि शहर में 24 घंटे के अन्तराल में पानी की सप्लाई की जा रही है। जबकि हकीकत यह है कि शहर के अधिकांश कॉलोनियों में 48 घंटे में पीने का पानी मिल रहा है वह भी पर्याप्त मात्रा नहीं मिल रहा है। लोगों को पीने के पानी के लिए चम्बल पेयजल परियोजना, मेजा बांध, ककरोलिया घाटी समेत बोरिंग से आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा शहर में1926 हैण्डपम्प भी संचालित है। इन तीन परियोजनाओं से प्रतिदिन80 एमएलडी लेकर लोगों को सप्लाई की जा रही है। जबकि आवश्यकता मात्र 61 एमएलडी पानी की है। यानी १९ एमएलडी पानी अतिरिक्त दिया जा रहा है। उसके बाद भी कई कॉलोनियों को पानी नसीब नहीं हो रहा है।
योजना के साथ नहीं हो रही जला आपूर्ति
शहर में जलदाय विभाग की ओर से किए जा रहे पानी की सप्लाई के लिए कोई योजना नहीं है। इसके कारण कुछ लोगों को प्रेशर के साथ समय से अधिक पानी मिल रहा है तो कई कॉलोनियों में टेल तक पानी पहुंच तो रहा है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहा है। कई घरों के बाद बनी कुण्डियों में पानी सड़कों पर बहता रहता है। तो कुछ लोग सुबह-सुबह सड़कों व अपने चौपहिया वाहनों को धोने में ही पानी को बर्बाद करते रहते है। जिस पर किसी तरह की कोई रोक नहीं है।
मई-जून में आ सकती परेशानी
मार्च माह में ही गर्मी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। मई-जून में गर्मी अपने पीक पर होगी। ऐसे में घरों में वाटर कूलर भी चलेंगे। इसके लिए पानी की खपत बढ़ जाएगी। वही पीने के पानी की खपत भी बढ़ेगी। ऐसे समय में पानी का संकट खड़ा हो सकता है।
एक नजर में पानी की गणित
650 लाख लीटर चम्बल से आ रहा
70 लाख लीटर ककरोलिया घाटी दे रही
70 लाख लीटर मेजा बांध कर रहा आपूर्ति
135 लीटर प्रति व्यक्ति पानी की आपूर्ति
180 लीटर इस समय दे रहे पानी
4,50,000 जनसंख्या
1926 हैण्डपम्प संचालित
61 एमएलडी पानी की मांग
80 एमएलडी पानी की सप्लाई
24 घंटे कुछ कॉलोनियों में सप्लाई
48 घंटे कुछ कॉलोनियों में सप्लाई
source https://www.patrika.com/bhilwara-news/what-a-waste-of-priceless-neer-in-bhilwara-6768114/
Comments
Post a Comment