भीलवाड़ा जिले में 14 बार हो चुके हमले

भीलवाड़ा।
बजरी के अवैध परिवहन रोकने को जिला प्रशासन की संयुक्त टॉस्क फोर्स भीलवाड़ा जिले में पूरी तरह फेल नजर आ रही है। लगातार हो रहे हमलों के बाद छह विभागों की संयुक्त टॉस्क फोर्स अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी का ठिकरा फोडने में जुटे हुए है। ऐसे में बेरोकटोक दौड़ रहे बजरी के वाहन प्रशासन की व्यवस्थाओं को ठेंगा दिखा रहे है। गंभीर बात यह है कि संयुक्त टॉस्क फोर्स को पिछले साल में कई बार बजरी माफियाओं के हमले का सामना करना पड़ा है। इसमें उपखण्ड अधिकारी के चालक तक की ट्रेक्टर चालक ने अपनी चपेट में लेकर हत्था कर दी थी।
प्रदेश में बजरी के परिवहन को रोकने के लिए सरकार के निर्देश पर प्रत्येक जिले में वन विभाग, राजस्व विभाग, परिवहन विभाग, खनन विभाग, वाणिज्यिक कर विभाग व पुलिस की संयुक्त टॉस्क फोर्स का गठन १८ जनवरी को किया गया। इसके तहत सभी विभागों को मिलकर बजरी परिवहन रोकने के प्रयास किए जाने थे। लेकिन जिले में बजरी को रोकने के लिए कोई भी विभाग जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं है। बजरी परिवहन रोकने के लिए पुलिस विभाग ने बजरी परिवहन रोकने संबंधित मामलों में रूचि लेना बंद कर दिया है, जबकि वन विभाग भी नए-नए नियमों की हवाला देकर बचने में लगा हुआ है। इतना ही नहीं जिले के परिवहन विभाग, खान विभाग, व राजस्व विभाग को बजरी परिवहन संबंधित मामलों से कोई मतलब भी नहीं है। विभागों के अधिकारियों की ओर से बैठक की औपचारिकता तो निभाई जा रही है, लेकिन जिले में कहीं भी बजरी परिवहन को लेकर कोई भी रणनीति नहीं बनाई है। हवा में तीर चला रही टॉस्क फोर्स पर माफियाओं के हमले के रूप में सामने आ रहा है।
प्रदेश के हर जिले में हो रहे हमले
संयुक्त टॉस्क फोर्स पर नजर डाले तो बीते सालों में प्रदेश में 169 बार बजरी माफियाओं के हमलों का सामना करना पड़ा है। इसमें भीलवाड़ा जिले में १४ मामले हो चुके है। जबकि सर्वाधिक हमले धौलपुर में 27 मामले दर्ज हुए है। इसके अलावा टोंक में 26, सवाईमाधोपुर 18, कोटा 11, दौसा 9, करौली 8, जयपुर व बांरा ७-७, राजसमंद ६, पाली, भरतपुर व उदयपुर में 5-5, अलवर व चित्तौडगढ़ में 4-4, बाड़मेर, जालौर, सिरोही, नागौर में 2-2, बूंदी में 3, सिरोही, प्रतापगढ़, अजमेर में एक-एक मामले दर्ज किए गए है। वही भीलवाड़ा जिले में करीब २५ लाख रुपए का जुर्माना वसूल किया गया।
जिम्मेदारी को टाल रहे टॉस्क फोर्स विभाग
बजरी के वाहनों को धर-पकड़ पर संयुक्त विभागीय टास्क फोर्स का विभाग अपनी उपलब्धियां बताते हुए दूसरे विभाग पर सहयोग नहीं करने का आरोप मढ़ देता है। संयुक्त विभागीय टास्क फोर्स में सबसे अधिक सूचना तंत्र पुलिस का मजबूत माना जाता है। लेकिन जहां पुलिस कभी-कभार बजरी के वाहन को पकड़ती तो वह अन्य विभागों पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगा देती है। वहीं बजरी परिवहन के लिए जिम्मेदार वन विभाग अपने ही क्षेत्र के बजरी के खनन वाले स्थानों को भी चिन्हित नहीं कर पाया है। इतना ही नहीं जिले के राजस्व विभाग, परिवहन विभाग, खनन विभाग ने बजरी के परिवहन पर आंखे ही मूंद रखी है।
उजागर नहीं हो रवन्ना का खेल
शक्करगढ़ थाना पुलिस की ओर से पकड़े गए ४२ वाहनों में से २८ वाहनों के रवन्ना फर्जी सामने आए। रवन्ना का यह खेल लम्बे समय से चल रहा है। लेकिन इस गिरोह का किसी ने अभी तक पर्दापाश नहीं किया है कि आखिर इसके पीछे किसका हाथ है। बजरी की लीज बाडमेर में बताई जा रही है तो रवन्ना जैतारण का बताया जा रहा है। पिछली बार भी जोधपुर के रवन्ना से जहाजपुर में बजरी भरने की बात सामने आई थी। लेकिन अभी तक इसका खुलासा नहीं हुआ कि आखिर रवन्ना कौन बना रहा है।



source https://www.patrika.com/bhilwara-news/14-times-attacks-in-bhilwara-district-in-bhilwara-6770974/

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