भीलवाड़ा में हरणी पहाड़ी खींच रहा पर्यटकों को
भीलवाड़ा। वस्त्रनगरी की आबो हव्वा में बढ़ते प्रदूषण को कम करने और लोगों को प्रकृति के बीच रमने व स्वच्छंद वितरण के लिए जिला प्रशासन दो और नए स्मृति वन शहर में ऑक्सजीन हब के रूप में विकसित करेगा। इधर, हरणी की पहाड़ी खूबसूरत रमणीय वन क्षेत्र से घिरी हो कर शहर की प्राण वायु बनी हुई है।
शहर के करीब 150 बीघा में फैली हरणी की पहाड़ी व 315 बीघा में फैला स्मृति वन शहरवासियों के लिए वरदान साबित हो रहा है। ग्राम्यवन सुरक्षा एवं प्रबंध समिति हरणी द्वारा हरणी महादेव के पास स्थित वन विभाग की भूमि को गोद लेकर लगभग 29 हजार पौधरोपण किए है। यहां काटे गए पेड़ों के स्थान पर रोंपे गए पौधे भी अब बड़े वृक्षों का रूप लेकर शहरवासियों को प्राणवायु दे रहे हैं। उन पौधों में लाखों की संख्या में परिंदों व वन्यजीवों ने अपना आश्रय स्थल बना रखा है। पहाड़ी पर 5 एनिकट व 15 चेकडेम बनाने के साथ ही जल व मृदा संरक्षण के ऐतिहासिक कार्यों के साथ ही पहाड़ी की चोटी पर व्यू पॉइंट बनाया, जिससे समूचा स्मृति वन व पहाड़ी दिखाई देती है।
छोटी हरणी व बड़ी हरणी के लोगों के सहयोग से ग्राम्यवन सुरक्षा एवं प्रबंध समिति हरणी ने पुराने-बड़े वृक्षों को कटने से रोकने व नए पौधारोपण करने के तहत अपनों की स्मृति तथा अपनों के जन्मदिन के अवसर पर एवं अन्य खुशी के अवसरों पर पौधारोपण की नई परम्परा भी शुरू की है, जिसके कारण समूचा बंजर पहाड़ी क्षेत्र भीलवाड़ा का प्राणवायु का केन्द्र बनकर ऑक्सीजन हब के रूप में प्रकृति की छंटा को बिखर रहा है।
यहां हरणी की पहाड़ी पर समाज सेवी अन्ना हजारे, स्वदेशी अभियान के प्रणेता स्व. राजीव दीक्षित, पूर्व राज्यपाल व मुख्यमंत्री दिवंगत शिवचरण माथुर, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, पंजाब के तत्कालीन राज्यपाल वी.पी. सिंह सहित अनेक न्यायाधिपति, सांसदों, विधायकों व देश की प्रख्यात शख्सियतों ने पौधारोपण किया है, हरणी की पहाड़ी छात्र-छात्राओं के लिए पर्यावरण शिक्षा का केन्द्र बन चुका है, जहां सैकड़ों प्रजातियों के औषधिय व अन्य पौधे लगाकर पेड़ विकसित होकर लाखों परिन्दों का बसेरा बन चुके हैं व पहाड़ी पर राष्ट्रीय पक्षी मोर, उल्लू, गिद्ध, खरगोश, सियागोश सहित अनेक प्रजातियों के वन्यजीव व तितलियां, चिडिय़ा चहचहाट करती हुई दिखलाई देती है।
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ग्राम्य वन सुरक्षा एवं प्रबंध समिति हरणी अध्यक्ष बाबूलाल जाजू बताते है कि हरणी पहाड़ी क्षेत्र वस्त्रनगरी का ऑक्सीजन हब बन चुका है। प्रकृति का सौंंदर्य यहां स्मृति वन तक में बिखरा है, शहर में अन्य स्थलों को भी प्रकृति की गोद में रचाने व बसाने के लिए जिला प्रशासन को नई योजनाओं का प्रस्ताव भेजा गया है।
जाजू बताते है कि स्मृति वन अब शहर में पसंदीदा पर्यटन स्थल के रूप में उभरा है। तत्कालीन जिला कलक्टर सुधांशु पंत ने 2005 में स्मृति वन की रूपरेखा को हरी झंडी दी थी। यहां भीलवाड़ा की प्राणवायु का केन्द्र बनाने के लिए प्रशासन ने 165 बीघा जमीन स्मृति वन के नाम रिकॉर्ड में दर्ज करते हुए आवश्यक निर्माण कार्य के अलावा केवल पौधारोपण ही करने की स्वीकृति प्रदान की थी। तत्कालीन कलक्टर राजीव सिंह ठाकुर ने वर्ष 2006 में स्मृति वन की सुरक्षा के लिए बाउण्ड्री वाल का कार्य शुरू किया था। स्मृति वन में सघन पौधारोपण, भ्रमण के लिए कच्चा व पक्का ट्रेक, स्मृति वन के बीच तालाब के साथ ही योगा व एक्सरसाइज के लिए एक उद्यान का निर्माण कराते हुए फु टपाथ, झरना, ग्रीन हाउस व अन्य सुविधाएं भी विकसित की। वर्तमान में स्मृति वन की विस्तार योजना में एक कच्चा ट्रेक व साइकिल ट्रेक का निर्माण भी नगर विकास न्यास के अधिकारियों के सहयोग से पूर्ण हो चुका है।
दो और नए स्मृति वन पर काम
औद्योगिक व वाहनों के बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए शहर में 25-25 हैक्टेयर के दो और स्मृति वन विकसित करने की योजना पर प्रशासन के सहयोग से यूआईटी काम कर रहा है। इसके लिए यहां मानसरोवर झील के पास 90 बीघा जमीन का चयन किया है । इसी प्रकार कोठारी नदी के उस पार तेलीखेड़ा के निकट तालाब के पास 25 हैक्टेयर भूमि में दूसरा स्मृति वन बनाने की कार्य योजना है। स्मृति वन के बाद दो नए स्मृति वन क्षेत्र विकसित करने के लिए ग्राम्य वन सुरक्षा एवं प्रबंध समिति हरणी के अध्यक्ष बाबूलाल जाजू ने उक्त प्रस्ताव जिला कलक्टर शिवप्रसाद एम नकाते को भिजवाए है। 90 बीघा भूमि में स्मृति वन मानसरोवर झील के पास बनने वाले स्मृति वन का नाम लाल बहादुर शास्त्री स्मृति वन रखकर उसके चारों ओर सुरक्षा दीवार बनाकर उसमें अधिक प्राणवायु व लम्बी उम्र के पौधे लगवाकर उसे भीलवाड़ा के किसी औद्योगिक घराने को रखरखाव व्यवस्था पर दिया जाने का सुझाव दिया है।
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source https://www.patrika.com/bhilwara-news/tourists-pulling-the-harani-hill-in-bhilwara-6577546/
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