जीवनरक्षक इंजेक्शन के लिए डॉक्टर की मुहर जरूरी
सुरेश जैन
भीलवाड़ा।
कोरोना से बचाव के लिए सरकारी अस्पताल में जीवन रक्षक इंजेक्शन रेमडेसिविर और टोसिलिजुमेब का खूब इस्तेमाल किया गया। हालांकि टोसिलिजुवेब कम लगाए गए। सरकारी अस्पताल में ये नि:शुल्क लगाए गए। बाजार में मरीजों ने खुद के बचाव के लिए उपयोग किया। कोरोना संक्रमित और गंभीर मरीजों के लिए बाजार से लेकर महात्मा गांधी अस्पताल में ये इंजेक्शन खूब लगे। जैसे-जैसे संक्रमण कम नजर आने लगा तो इंजेक्शन की मांग से लेकर बिक्री घट गई। अब संक्रमण बढऩे लगा तो मांग भी बढ गई।
बाजार में जुलाई-अगस्त से खपत शुरू हुई। निजी हॉस्पिटलों में शुरू में करीब ८०० इंजेक्शन बिके, लेकिन सितम्बर में बिक्री अचानक बढ़ी। औसतन ढाई हजार इंजेक्शन बिके। निजी हॉस्पिटलों ने मरीजों के लिए खरीदे। अक्टूबर में मांग घटने लगी। रेमडेसिविर की मांग केवल ३० व टोसिलिजुमेव की ५ प्रतिशत मांग रही। अब फिर मांग बढऩे लगी है। रेमडेसिविर इंजेक्शन पांच कंपनियां बना रही थी, जबकि टोसिलिजुमेव केवल एक कंपनी बना रही है।
यह है इनकी दर
रेमडेसिविर की कीमत बाजार में २८०० से ५००० रुपए तक है। यह पांच या छह इंजेक्शन लगाने होते हैं। टोसिलिजुमेव की ३०,८०० रुपए कीमत है। इसे बाजार में ३५ से ४० हजार तक में बेचा गया। यह एक या दो इंजेक्शन एक मरीज को लगाते हैं। एमजीएच में रेमडेसिविर के २३४५ इंजेक्शन तथा टोसिलिजुमेव के ५६ इंजेक्शन आ चुके है। इनमें मात्र ६ इंजेक्शन टोसिलिजुमेव के बचे है जबकि रेमडेसिविर के करीब ४०० इंजेक्शन शेष हैं। एमजीएच में यह इंजेक्शन सरकारी स्तर पर भर्ती मरीजों को चिकित्सक की सलाह पर नि:शुल्क लगाए जा रहे हैं। इसके लिए डॉक्टर की छाप अनिवार्य है। सूत्रों की मानें तो यह छाप भी आसानी से नहीं मिलती है। किसी उच्च अधिकारी के कहने या जान-पहचान पर ही लगाई जाती है। यह छाप अस्पताल के अन्दर कोविड वार्ड में इधर से उधर घूमती है।
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सरकार ने रेमडेसिविर और टोसिलिजुमेव जीवन रक्षक इंजेक्शनों बड़ी संख्या में उपलब्ध कराए हैं। ये इंजेक्शन अस्पताल में नि:शुल्क लगाते हैं। निजी चिकित्सालय में कीमत ली जाती है। ये इंजेक्शन वाकई जीवन रक्षक साबित हुए।
डॉ. मुस्ताक खान, सीएमएचओ
source https://www.patrika.com/bhilwara-news/doctor-s-seal-required-for-life-saving-injection-in-bhilwara-6540554/
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