3 साल में मिलावट के 100 मामले, सजा एक में भी नहीं
सुरेश जैन
भीलवाड़ा।
जिले में शुद्ध के लिए युद्ध अभियान सोमवार से दीपावली तक शुरू होगा। खात बात है कि मिठाई, दूध व मसालों में किसी मिलावटखोर को जेल नहीं भेजा गया। बस, जुर्मान भर छूट जाते हैं। पिछले तीन वर्ष में खाद्य सामग्री के कुल ४४८ में से १०२ नमूने फेल हुए। जबकि कुछ मामले ऐसे थे जिनमें अलग तरह की मिलावट थी।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेन्द्रसिंह राणावत ने बताया कि तीन साल में १०० मामलों में चालन पेश किए। सभी लम्बित हैं। अनसेफ मामलों को छोड़कर जो मामले मिलावट के पकड़े जाते हैं, इसकी सुनवाई एडीएम प्रशासन की कोर्ट में होती है। टेस्ट करवाने के बाद सब स्टैडर्र्ड व मिस ब्रांड आने पर न्याय निर्णय अधिकारी यानी एडीएम के पास मामला जाता है। अनसेफ मामले न्यायालय में जाते हैं, जिनमें सजा का प्रावधान है। छह माह से लेकर उम्र कैद तक का प्रावधान है।
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वर्ष नमूने अशुद्ध चालान
२०१८ १८२ ४८ ४८
२०१९ १८८ ४३ ४३
२०२० ७८ ११ ०९
योग ४४८ १०२ १००
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इनमेंमिलावट
जांच के दौरान सबसे ज्यादा मिलावट मावे के उत्पादों में मिली है। दूध में नमक और मिल्क पाउडर में मिलावट मिली। प्राकृतिक दूध गाय, भैंस व बकरी के दूध में मिक्स मिल्क में एसएमपी मिलाना मिलावट है। इससे मधुमेह बीपी व मोटापे जैसी समस्या होती है। मावा खोया के नमूने भी अमानक पाए गए। खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि कुछ मामलों में जुर्माना वसूल किया गया है। लेकिन पिछले तीन साल में किसी को जेल नहीं हुई है।
कंट्रोल रूम स्थापित
सीएमएचओ कार्यालय पर कंट्रोल रूम स्थापित किया है। उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. घनश्याम चावला प्रभारी हैं। वे जिले से प्राप्त शिकायतों को जिला स्तरीय कमेटी को उपलब्ध कराएंगे। इस आधार पर भी जांच दल कार्रवाई करेंगे। कंट्रोल रूम के नंबर 01482-232646 हैं। कंट्रोल रूम प्रभारी के मोबाइल नंबर 9829508745 है।
source https://www.patrika.com/bhilwara-news/100-cases-of-adulteration-in-3-years-not-even-one-sentence-6484523/
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