भीलवाड़ा में कर्मचारियों ने यह क्या घपला कर दिया, जानिए सच

भीलवाड़ा। राजकीय सेवा में होने के बावजूद जिले के डेढ़ हजार राजकीय कर्मचारियों ने खुद को गरीब बताते हुए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत बंटने वाला दो रुपए किलो का गेहूं डकार लिया। जांच में खुलासे के बाद अब जिला रसद विभाग एेसे कर्मचारियों के खिलाफ नोटिस थमाते हुए उनसे बाजार दर पर गेहूं की राशि वसूल कर रहा है, हालांकि अभी एेसे कर्मचारियों के खिलाफ रसद विभाग ने अभी कोई पुलिस कार्रवाई नहीं की है।

प्रदेश में ५० लाख फर्जी राशन बनने और लाखों फर्जी यूनिट से सरकारी गेहूं, चीनी, चावल ठकराने के मामले सामने आने के बाद राज्य सरकार एेसे फर्जी राशन कार्ड को निरस्त करवा रही है। इसी अभियान के तहत प्रदेश में हजारों राजकीय कर्मचारियों के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (एनएफएस) के तहत पंजीकृत होने का भी बड़ा खुलासा हुआ है।

फर्जी तरीके से योजना के तहत जुड़ते हुए कई सरकारी कर्मचारियों ने बाजार में २० से ३० रुपए किलो रुपए की कीमत का मिलने वाला गेहूं गरीब बन कर महज दो रुपए प्रति किलो की दर से उठा लिया।

एनएफएस की हो रही जांच
जिले में रसद विभाग जनवरी माह से एनएफएस से बांटे गए गेहूं के स्टॉक की जांच कर रहा है। स्टॉक के अतिरिक्त क्षेत्र के वार्ड में भी सर्वे कराया गया। इसके जरिए ये पता लगाया गया कि सरकारी कर्मचारी कहीं गलत तरीके से तो योजना से नहीं जुड़े हुए है। जुड़े है तो उन्हांेंने अभी तक कितना गेहूं फर्जी तरीके से उठा लिया है। इसी प्रकार सर्वे में व्यक्ति की मृत्यु होने, रोजगार के लिए बाहर जाने, विवाह के बाद जिला बदलने, दिव्यांग की स्थिति व उज्जवला गैस के लाभार्थियों को सूचीबृद्ध किया जा चुका है। अभी तक की जांच में जिले में जारी हुए दो हजार राशन कार्ड निरस्त हो चुके है।

अब दे रहे दुहाई
नेटिस जारी होने के बाद कर्मचारी अपना पक्ष रखने रसद विभाग पहुंचे रहे है। इनमें कईयों ने योजना का लाभ नहीं उठाने की दुहाई दे रहे है, कई ने गलती से उनका नाम जुड़े जाने की भी बात कही है। कुछेक ने कबूला भी है कि उनके परिजनों ने पारिवारिक कार्ड को गलती से योजना से जुड़वा लिया और वो उक्त गेहूं की डिफेरंस राशि का भुगतान करने को तैयार है।

१८ कर्मियों से वसूले तीन लाखजिले में राशन कार्ड की जांच के दौरान करीब डेढ़ हजार राजकीय कर्मचारियों के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़े होने की पुष्टि हुई है। एेसे कर्मचारियों की पहचान की जा रही। इनमें181 सरकारी कर्मचारियों को २७ रुपए प्रति किलो की दर से वसूली के नोटिस जारी किए जा चुके है। इनमें 1८ कर्मचारियों से जिला रसद विभाग दो लाख ८० हजार रुपए की वसूली कर चुका है। इनमें शिक्षा व चिकित्सा विभाग के कर्मी सर्वाधिक है। किसी के भी खिलाफ एफ आईआर दर्ज नहीं हुई है।
- सुनील वर्मा, जिला रसद अधिकारी भीलवाड़ा

सही जांच हो तो कई नाम कट जाए
सरकारी कर्मचारी या उनके परिवार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना मे पात्र बन गरीब तबके के लोगों का हक छीन रहे है । अगर वास्तविकता मे सर्वे करवाया जाऐ तो कितने ही लोग पात्रता श्रेणी से बाहर आ जाएंगे और उनकी जगह गरीब दिहाड़ी मजदूरों का नाम जुड सकेगा । वर्तमान में खाद्य सुरक्षा योजना मे 69 फीसदी से ज्यादा परिवार जुडे हुए हैं । इसका मुख्य कारण सरकार द्वारा जनसंख्या का आंकडा 2011 की जनसंख्या के अनुरूप लिया जा रहा है । दस वर्षों में जनसंख्या बढी है । इसलिए 2011 की जनसंख्या का 90 फीसदी चयन किया जाता हैं तो वर्तमान मे 69 फीसदी के बराबर होता है । सरकारी कर्मचारियों द्वारा खाद्य सुरक्षा का लाभ लेना गलत है इनकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिये ।
- संजय तिवाड़ी, जिलाध्यक्ष, ऑल इंडिया फेयर प्राइस शोप डीलर फेडरेशन, भीलवाड़ा



source https://www.patrika.com/bhilwara-news/what-did-the-employees-in-bhilwara-do-to-make-a-mistake-know-the-trut-6212392/

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